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_खुशराज वैष्णव @ फुलिया कलां_
भीलवाड़ा/फूुलिया कलां मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना ) के तहत काम करने वाले मजदूरों के सब्र का बांध अब टूट गया है। ग्राम पंचायत फूलिया कलां के दर्जनों मजदूरों ने आज एकजुट होकर जिला कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन सौंपते हुए प्रशासन के खिलाफ कड़ा रोष व्यक्त किया है।
*क्या है मुख्य समस्या?*
मजदूरों का आरोप है कि उन्होंने विभिन्न कार्यों पर नियमित रूप से मजदूरी की है, लेकिन पिछले 6 पखवाड़ों (करीब 3 महीने) का भुगतान अभी तक उनके बैंक खातों में नहीं आया है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे इन श्रमिकों का कहना है कि मेहनत का पैसा न मिलने के कारण अब उनके घरों में 'चूल्हा जलाना' भी मुश्किल हो गया है।
*प्रशासन को दो टूक चेतावनी*
ज्ञापन में स्पष्ट कहा गया है कि मजदूर अपनी समस्या लेकर कई बार अधिकारियों के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला। श्रमिकों ने प्रशासन को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि:
बकाया भुगतान तुरंत खातों में डाला जाए।
यदि मांग पूरी नहीं हुई, तो मजदूर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन और बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
आंदोलन की समस्त जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
*"भीख नहीं, अपना हक मांग रहे हैं"*
प्रदर्शनकारी मजदूरों ने भावुक और कड़े लहजे में कहा, "हम प्रशासन से कोई भीख नहीं मांग रहे, बल्कि अपनी हाड़-तोड़ मेहनत का पैसा मांग रहे हैं। मजदूर पसीना बहाता है ताकि उसका परिवार पल सके, लेकिन यहाँ तो न्याय के बदले सिर्फ इंतजार मिल रहा है।"
अब देखना यह होगा कि इस ज्ञापन के बाद जिला प्रशासन कितनी जल्दी हरकत में आता है और इन गरीब मजदूरों के खातों में उनकी मेहनत की कमाई पहुँचती है।
🟡 *यक्ष प्रश्न*
सरकार 'मनरेगा' की जगह 'जी राम जी' योजना लाकर 125 दिन के रोजगार का वादा कर रही है, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि फूलिया कलां के मजदूरों को पुराने काम के पैसे के लिए भी तरसना पड़ रहा है।
एक तरफ केंद्र सरकार 'जी राम जी' विधेयक 2025 के जरिए ग्रामीण व्यवस्था सुधारने का दावा कर रही है, वहीं भीलवाड़ा के फूलिया कलां में प्रशासन की लापरवाही इन दावों की पोल खोल रही है। जब पुराने कानून (मनरेगा) के तहत 6 पखवाड़े का भुगतान बकाया है, तो नए कानून से मजदूरों को कितनी उम्मीद होगी?"
*"जी राम जी" का नारा... पर मजदूर बेचारा?*
मजदूरी के पैसे नहीं मिले, चूल्हा जलना मुश्किल। क्या नई योजना सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगी या फूलिया कलां के मजदूरों को उनका हक मिलेगा?